नई दिल्ली. इस्लामाबाद के भारतीय उच्चायोग में सेकंड सेक्रेटरी माधुरी गुप्ता आईएसआई के लिए जासूसी करती पकड़ी गई। आखिर कैसे बनी वह एक महिला जासूस? माधुरी गुप्ता मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली है। वह एक महत्वाकांक्षी महिला थी। दिल्ली की विकासपुरी के एक फ्लैट में अकेली रहती थी। माता-पिता गुजर चुके हैं। अन्य किसी रिश्तेदार का पता नहीं। दिल्ली और नोएडा में तीन फ्लैट। 80 के दशक में विदेश मंत्रालय में बतौर जूनियर क्लर्क नियुक्त हुई थी। इसके बाद मलेशिया, बगदाद और कोसोवो के भारतीय दूतावासों में बतौर अनुवादक नियुक्त हुई। मलेशिया में ही वह पाकिस्तानी जासूसों के संपर्क में आई। उसने कुछ समय दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में भी काम किया। वर्ष 2006-2007 में दिल्ली में विदेश नीति के थिंकटैंक इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्लूए) में बतौर सहायक निदेशक काम किया। उर्दू की अच्छी जानकार होने की वजह से इस्लामाबाद में पोस्टिंग मिली। हालांकि पाक में अकेली महिला की पोस्टिंग असाधारण मामला था। बताते हैं कि विदेश मंत्रालय में किसी ‘गॉडफादर‘ ने इसे अंजाम दिया।
कैसे पहुंची पाकिस्तान? - पाक में अकेली महिला की पोस्टिंग असाधारण मामला था। बताते हैं कि विदेश मंत्रालय में किसी ‘गॉडफादर‘ ने इसे अंजाम दिया।
क्या थी जिम्मेदारी?- पाकिस्तानी अखबारों और पत्रिकाओं से भारत के हित की खबरें और लेखों का उर्दू से अंग्रेजी में अनुवाद। पाकिस्तानी पत्रकारों से संबध बनाकर भारत के हित की खबरें छपवाना।
कितनी महत्वपूर्ण थी लीक हुई सूचनाएं? - भारतीय अधिकारियों का मानना है कि माधुरी के पास सामरिक, राजनीतिक या रणनीतिक महत्व की सूचनाएं नहीं होतीं। इसलिए खतरा बड़ा नहीं।
कैसे लीक की सूचनाएं? - वह अपने पाकिस्तानी सूत्रों से इस्लामाबाद के जिन्ना मार्केट (मरकज सुपर मार्केट) के कैफे इफ्फी में मिलती थी। उसके चार सूत्र थे जिनसे उसे राणा नामक एक पाकिस्तानी पत्रकार ने मिलवाया था।
क्यों की जासूसी?-अभी साफ नहीं। पैसों के लिए, प्रेम के लिए या काम से खुश न होने से।
आखिर कैसे हुआ संदेह?-भारतीय सेना के अभ्यास के बारे में बार-बार पूछा तो रक्षा अताशे के कान खड़े हुए। उच्चयोग के अफसरों की विदेश यात्राओं के बारे में जानकारी मांगती रहती थी। इस साल फरवरी में भारत-पाक विदेश सचिव स्तरीय बातचीत पर सवाल पूछे। पाक में बेखौफ घूमती। इस्लामाबाद के पॉश इलाके में उच्चयोग परिसर से अलग घर में रहने लगी।
वतन में भी थे भेदिए-जम्मू-कश्मीर के राजौरी में एक दंपती से मिलने जाती थी। दंपती में से महिला कई बार पाकिस्तान जा चुकी थी। दंपती से मिलने उनका एक रिश्तेदार सैन्य अधिकारी भी आता था।
आईएसआई को यह बताया-भारतीय उच्चायोग में अफसरों के रूप में मौजूद खुफिया एजेंटों के नाम। दक्षिण एशिया व मध्य-पूर्व के खुफिया एजेंट बताए। अफगानिस्तान पर भारत का प्लान। कई अधिकारियों से चर्चा के आधार पर तैयार दस्तावेज के सात ई-मेल। पाक में रॉ के स्टेशन हेड आरके शर्मा से मिली जानकारियां। मुख्य काम था-भारतीय उच्चायोग के माहौल और पाकिस्तान संबंधी रणनीति की जानकारी देना। भारतीय उच्चायोग में बगिंग (जासूसी उपकरण लगाना) का भी संदेह।
मामले कैसे कैसे ?
देश में
2007 में कोलंबो में नियुक्त विदेश सेवा के अधिकारी रवि नायर को एक चीनी महिला के साथ संबंधों के आरोप में वापस बुलाया गया
2005 में रिसर्च और एनालिसिस विंग (रॉ) के अतिरिक्त निदेशक रविन्दर सिंह अमेरिका भाग गए। उन पर अमेरिकी जासूस होने का शक था।
अभी तक नौ रॉ अधिकारियों को विदेशी एजेंसियों के लिए जासूसी के संदेह में बर्खास्त किया गया है।
1992-93 में रॉ के एक वरिष्ठ अधिकारी का निजी सचिव लंदन में गायब हो गया था।
इससे पहले रॉ अधिकारी अशोक साठे रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गए। उन पर अमेरिका भाग जाने और ईरान के खुर्रमशहर स्थित भारतीय दूतावास में हुई आगजनी में हाथ होने का संदेह है।1985 में एक रॉ अधिकारी लंदन में गायब हो गया था। वह काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास में नियुक्त था।
विदेश में
हालैंड की नृत्यांगना माताहारी (असली नाम गेरत्रुड मारग्रेट जेले) विश्व की सबसे प्रसिद्ध महिला जासूस रही। उसे 1917 में फ्रांस में फायरिंग स्पॉड के जरिए मौत की सजा दी गई।
अमेरिका महिला वर्जीनिया हाल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की पुलिस गेस्टॉपो द्वारा सबसे खतरनाक जासूस करार दी गई।
विश्व की कुछ प्रसिद्ध महिला जासूस
माता हारी
माता हारी दुनिया की सबसे प्रसिद्ध जासूस थीं। उनका पूरा और असल नाम मार्गरेथा गीरट्रूइडा जेले मैक्लिओड था। नीदरलैंड में उनका जन्म हुआ। वे अपने आपको इग्जॉटिक डांसर मानती थीं। प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत में जर्मनी और फ्रांस को शक हुआ कि माता हारी उनके विरोधियों के लिए जासूसी कर रही हैं। इस पर उन्हें ट्रायल के लिए फ्रांस लाया गया। हालांकि उन पर लगे आरोप साबित नहीं हो पाए। लेकिन अपराधी मानते हुए आखिरकार 15 अक्टूबर 1917 को उन्हें फांसी की सजा दे दी गई।
नूर इनायत खान
नूर का जन्म 1914 में हुआ था। छोटी सी उम्र में वह अपने परिवार के साथ इंग्लैंड चली गईं। वहां रहते हुए नूर ने एयर फोर्स के महिला सहायक दल में जॉइन किया। उनकी फ्रेंच की अच्छी जानकारी और बोलने की क्षमता ने स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप का ध्यान अपनी ओर आकर्षति कर लिया और फिर वह बतौर जासूस काम करने के लिए तैयार हो गईं। जल्द ही फ्रांस के एक शहर में महिला जासूस टीम के साथ काम करना शुरू कर दिया। आखरिकार उन्हें अरेस्ट कर लिया गया। जब उन्होंने इस बारे में कुछ भी बोलने से इनकार किया तो उन्हें जर्मनी के जेल में भेज दिया गया।
बेले बॉएड
सिविल वॉर शुरु होने से पहले वॉशिंगटन के सोशल सर्कल में आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी। 1864 में राष्ट्रपति जेफरसन डेविस ने उनसे अपना पत्र इंग्लैंड ले जाने के लिए कहा। जानकारी मिलते ही यूनियन नेवी ने उनके जहाज को पकड़ भी लिया। लेकिन वहां का इंचार्ज बेले के प्यार में इस कदर पागल था कि उन्होंने बेले को छोड़ दिया। बाद में बॉएड यूनाइटेड स्टेट में बतौर ऐक्ट्रेस काम करने लगीं। जहां उनका स्टेज पर नाम ला बेले रिबेले था।
सेरा एमा एडमंड्स
सेरा का जन्म 1841 में कनाडा मे हुआ था। किशोरावस्था में ही वे अपने घर से भाग गई थीं। गुजारा करने के लिए उन्होंने बाइबल के सेल्समैन का काम शुरु किया। उन्होंने खुद को फ्रैंक थॉमसन नाम दिया और बिल्कुल मर्दो की तरह पोशकें पहनना शुरु कर दिया। 1861 में फैं्रक (सेरा) की भर्ती सेना में हो गई। अगले दो साल के भीतर वह कई युद्ध भी लड़ीं और यूनियन आर्मी के लिए जासूसी भी की।
एलिजाबेथ वेन ल्यू
अमेरिका में गृह युद्ध के दौरान क्रेजी बेट के नाम से जानी जाती थीं। ल्यू को रिचमंड में बंधक बनाए गए कैदियों से मिलने के लिए भेजा गया। कैदियों ने उन्हें कई तरह की जानकारियां दीं। जिसे उन्होंने कहीं और पास कर दिया। एलिजाबेथ ने इसलिए भी क्रेजी बेट नाम का चोला पहन रखा था, ताकि लोग उनके बारे में यह सोचें कि वे मानसिक रूप से बीमार हैं। वह पुराने कपड़े और टोपी पहने रखतीं और खुद से बातें करती दिखाई पड़ती थीं। इसी कारण से बहुत से लोग उनके बारे में ऐसा सोचते थे कि किसी अन्य जगह से जुड़ी उनकी संवेदनाएं या जासूसी का काम सिर्फ एक पागलपन है।
और भी हैं नाम
1. एमीलिन पिगोट
2. एनटोनिआ फोर्ड
3. मैडम ला फोर्स
4. पॉलिन कुशमैन
5. रोज ओनील ग्रीनहाऊ
6. इयूगेनिआ फिलिप्स
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